ek baat aaj dekhi, mahila ho to pati ka naam, bacche hain to kitne, yaadgaar tarikh ke sawaal per shaadi kis din hui jaise sawal hi saamne rakh diye jate hain, ab bhi..
bas ho gaya mahila hone ki farz-adayegi !!!
Kya iske aalava, AAJ BHI mahila ke astitva ke saath aur sawaal nahin jud sakte ???
Khair 100 hon ya hazaar saal, lagta hai astitva kisi choukhate main baanda huaa hi rahega...
08 August 2011
१६ अप्रैल, इलाहाबाद यात्रा के बाद...
कल का तो पता नहीं, आज अँधेरा तारी है,
उस सितमगर के करम से, दिल छलनी मन भारी है...
उस सितमगर के करम से, दिल छलनी मन भारी है...
बिछुड़े दोस्तों के नाम!!
जो बिछुड़ गए वो दोस्त पुराने,
गुज़रे वक्त के वो याराने याद आते हैं,
बेतकल्लुफ़ी वो चुहलबाज़ी,
फिर इसरार कर मनाने याद आते हैं.
पलों में गुज़र गए वो ज़माने,
एहसासों में जज़्ब वो अपनापे,
अब ना वो दोस्त रहे ना वो याराने,
बस यादों में बसे वो मंज़र याद आते हैं.
काश! कोई राह उस ओर को खुल जाती,
तो दौड़ जाते उसी सरमाए की ओर,
जहाँ बीता था बचपन का कुछ वक्त,
जिससे जुड़े हर वाकये याद आते हैं.
साथ मिल-बैठ वो गप्प लगाना, हंसना-हंसाना औ रूठ जाना,
सवालों के छोर पकड़ते-पकड़ते,
एक-दूजे का हमसाया हो जाना,
बिछुड़ गए वो दोस्त अब भी याद आते हैं.
गुज़र गया वक्त पर,
वो यार पुराने अब भी याद आते हैं.
गुज़रा वक्त लौट नहीं आता,
बिछुड़ा कोई मिल नहीं पाता,
फिर भी यादों के इन मनकों से,
ज़िन्दगी की माला पिरोते हैं.
बिछुड़ गए वो दोस्त अब भी याद आते हैं...
गुज़रे वक्त के वो याराने याद आते हैं,
बेतकल्लुफ़ी वो चुहलबाज़ी,
फिर इसरार कर मनाने याद आते हैं.
पलों में गुज़र गए वो ज़माने,
एहसासों में जज़्ब वो अपनापे,
अब ना वो दोस्त रहे ना वो याराने,
बस यादों में बसे वो मंज़र याद आते हैं.
काश! कोई राह उस ओर को खुल जाती,
तो दौड़ जाते उसी सरमाए की ओर,
जहाँ बीता था बचपन का कुछ वक्त,
जिससे जुड़े हर वाकये याद आते हैं.
साथ मिल-बैठ वो गप्प लगाना, हंसना-हंसाना औ रूठ जाना,
सवालों के छोर पकड़ते-पकड़ते,
एक-दूजे का हमसाया हो जाना,
बिछुड़ गए वो दोस्त अब भी याद आते हैं.
गुज़र गया वक्त पर,
वो यार पुराने अब भी याद आते हैं.
गुज़रा वक्त लौट नहीं आता,
बिछुड़ा कोई मिल नहीं पाता,
फिर भी यादों के इन मनकों से,
ज़िन्दगी की माला पिरोते हैं.
बिछुड़ गए वो दोस्त अब भी याद आते हैं...
23 June 2011
तपिश के बाद
दूर आसमां तले कोई, तिनका-तिनका शाम छिटकाटा रहा,
जो रात गहरा गई, उठ तारों में लुका-छिपी खेलता रहा...
अलस्सुबह दौड़ सूरज को थाम लाया वोही, दिन चढे फिर फूँक मान-मार दुपहर बुझाई,
लो सूप लिए फिर वोही शाम छिटकाटा रहा, तपिश के बाद ठंडी हवा की तहान खोलता रहा...
जो रात गहरा गई, उठ तारों में लुका-छिपी खेलता रहा...
अलस्सुबह दौड़ सूरज को थाम लाया वोही, दिन चढे फिर फूँक मान-मार दुपहर बुझाई,
लो सूप लिए फिर वोही शाम छिटकाटा रहा, तपिश के बाद ठंडी हवा की तहान खोलता रहा...
21 June 2011
18 May 2011
कल तक ख़बरों में पढ़ा करते थे आज अपने घर पर भी बीत गई.
इतवार की रात एक कैब में लिफ्ट लेने के बाद भाई पर घेर कर हमला किया गया और सबकुछ लूट लिया. पी सी आर वेन के सामने से गुजरने और मदद के लिये आवाज़ देने पर भी कोई मदद नहीं मिली. अपनी ही सोसाइटी के सामने की सड़क से ले जाकर कोई २० किलोमीटर दूर फेंक कर गाड़ी पीछे कर उनके पैर पर चढाने की कोशिश भी की गई. भाई तो अँधेरे में भी किसी तरह फुटपाथ पर कूद कर बच गए और चोटिल हालत में बिना मदद मिले आधी रात में पैदल घर पहुंचे. घर में सभी ने शुक्र मनाया कि उन गुंडों ने जान बख्श दी.
एन सी आर में रहने वालों के साथ जब पुलिस ऐसा बर्ताव करती है तो बाकी जगहों का क्या हाल होगा, सोच कर रूह कांपी जा रही है.
दोस्तो, बहुत संभल कर रहिये!! कोई पुलिस-वुलिस नहीं है यहाँ. सब 'राम भरोसे हिन्दू होटल' वाला आलम है!!
एन सी आर में रहने वालों के साथ जब पुलिस ऐसा बर्ताव करती है तो बाकी जगहों का क्या हाल होगा, सोच कर रूह कांपी जा रही है.
दोस्तो, बहुत संभल कर रहिये!! कोई पुलिस-वुलिस नहीं है यहाँ. सब 'राम भरोसे हिन्दू होटल' वाला आलम है!!
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