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15 November 2011

आ मेरी जां!!

वहां नज़रों से बात निकली थी,
यहां धड़कनों ने कान खोल लिए,
बात अपनी तो बन ही जानी थी,
गुलों ने महक के राज़ खोल दिए!

वहां इकरारे-मोहब्बत हो ही जानी थी,
यहां वादा-ए-निबाही भी हमकदम हो लिए,
साज़े-ए-वफ़ा को बज ही जाना था,
सुरों ने छिड़ के राग बोल दिए!

वहां नज़रों से बात निकल गई,
यहां वो धड़कनों में जज़्ब हुई,
अब इस साथ से चमन गुलज़ार करें,
आ मेरी जां,
चश्मे-निगाही से तसव्वुरे-जानां करें!

आ मेरी जां!!

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