दूर आसमां तले कोई, तिनका-तिनका शाम छिटकाटा रहा,
जो रात गहरा गई, उठ तारों में लुका-छिपी खेलता रहा...
अलस्सुबह दौड़ सूरज को थाम लाया वोही, दिन चढे फिर फूँक मान-मार दुपहर बुझाई,
लो सूप लिए फिर वोही शाम छिटकाटा रहा, तपिश के बाद ठंडी हवा की तहान खोलता रहा...
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