माँ वो होती है जो आप की शक्ल बनने से पहले और उसे देखने से भी पहले से आप को प्यार करने लगती है!
उसको नहीं देखा हमने कभी पर उसकी ज़रूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी!!
सही बात है , भला माँ की सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी !! बहुत अच्छा लगा !!
मेरी तरफ से ,सभी माताओं के लिए ..... "माँ तुम्ही अमृत की धार और निःस्वार्थ प्रेम का सार हो माँ तुम निश्चय ही ईश्वर का अवतार हो माँ तुम निश्चय ही ईश्वर का अवतार हो "
सही बात है , भला माँ की सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी !!
ReplyDeleteबहुत अच्छा लगा !!
मेरी तरफ से ,सभी माताओं के लिए .....
"माँ तुम्ही अमृत की धार
और निःस्वार्थ प्रेम का सार हो
माँ तुम निश्चय ही ईश्वर का अवतार हो
माँ तुम निश्चय ही ईश्वर का अवतार हो "
माँ के बारे में जितना लिखा जाये कम ही है
ReplyDelete