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06 October 2010

माँ

माँ वो होती है जो आप की शक्ल बनने से पहले और उसे देखने से भी पहले से आप को प्यार करने लगती है! उसको नहीं देखा हमने कभी पर उसकी ज़रूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी!!

2 comments:

  1. सही बात है , भला माँ की सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी !!
    बहुत अच्छा लगा !!

    मेरी तरफ से ,सभी माताओं के लिए .....
    "माँ तुम्ही अमृत की धार
    और निःस्वार्थ प्रेम का सार हो
    माँ तुम निश्चय ही ईश्वर का अवतार हो
    माँ तुम निश्चय ही ईश्वर का अवतार हो "

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  2. माँ के बारे में जितना लिखा जाये कम ही है

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