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13 October 2010

कुछ नया

इस नई दुनिया में अब कुछ यूं नया किया जाए,
रिश्तों की उधडी डोर छोड़, कुछ नए नाते जोड़े जाएँ.
रिश्तों से तो पटी ये दुनिया, फिर भी दामन ख़ाली क्यों,
अजाने, अदेखे दोस्तों के नाम अब कुछ नया लिखा जाए.

4 comments:

  1. बहुत जल्द प्रतिक्रिया मिली... शुक्रिया.

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  2. अति सुंदर ..अगर मैं कलम की धनी होती ,तो आपके नाम ज़रूर कुछ लिखती :)

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  3. aapka itna likha kisi likhe se kam nahin Anju ji.

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