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13 October 2010

एक नई कोंपल

जैसे किसी पेड़ पर जब कोई कोंपल दिखती है तो वो बहुत कोमल और पवित्र लगती है, वैसे ही अभी पड़ोस में दो दिन की बच्ची ने अपने घर में प्रवेश किया... एकाएक मेरे मन में कोंपल का विचार कौंधा.
आखिर इंसान और पेड़ दोनों ही जब तक अस्तित्व में रहते हैं, तब तक कुछ न कुछ सृजन करते जाते हैं...

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