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18 August 2012

कसक

दोस्त!

आज लगा कि तुम से बात करूं!
लेकिन कहाँ से और कौन सी करूं शुरू?
बहुत दिनों से बात-बात पर याद आते रहे...
आज सोचा कि तुमसे बात कर ही डालूं!

ये तो पता नहीं कि तुम कहाँ हो, क्या कर रहे,
पर यकीन कि बात तुम तक मेरी जा पहुंचेगी!!

दोस्त!

क्या अब भी तुम झूलों पे पेंग देते हो?
बारिश में साथ भीगने का मज़ा लेते हो?
एक से रूठे तो दूसरे दोस्त के कंधे से टिके,
रुआंसे होते हो, तो कभी ज़ार-ज़ार रोते हो?

मीठी  इमली को चूसते हो, या अम्बिया की फांक चबाते हो?

ऐ दोस्त!

क्या अब भी अँधेरे से डर जाते हो,
बिजली कड़के तो हिल ही जाते हो?
मैं क्या आऊं तुम्हारा साथ देने को,
संग तेरे कोई गीत गुनगुनाने को?

क्या मेरा नाम याद है अब भी,
क्या कोई बात याद है अब भी?
दोस्त!! ऐ दोस्त!!


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