जब आह भरी तो पता चला, दर्द कहाँ लहराता है!
जब सांस भरी तो पता चला, चैन कहाँ से आता है,
जब पंख खोला तो पता चला, परवाज़ कहाँ से भरता है,
जब जान बची तो पता चला, अर्थ कहाँ से पाता है...
जब सांस भरी तो पता चला, चैन कहाँ से आता है,
जब पंख खोला तो पता चला, परवाज़ कहाँ से भरता है,
जब जान बची तो पता चला, अर्थ कहाँ से पाता है...