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24 February 2012

जब आह भरी तो पता चला, दर्द कहाँ लहराता है!

जब सांस भरी तो पता चला, चैन कहाँ से आता है,

जब पंख खोला तो पता चला, परवाज़ कहाँ से भरता है,

जब जान बची तो पता चला, अर्थ कहाँ से पाता है...