हर दर्द में तेरा एहसास रहता था,
तू होगा कोई ख्वाब ये खयाल रहता था,
आज जब साँस लेने पर भी दर्द उठा,
तू सच मेरे पास है, इससे इतेफाक हुआ.
...ऐ दर्द...
27 February 2011
21 February 2011
कुछ भी नहीं...
बात कुछ थी और, बात फकत कुछ भी नहीं,
मेरी औकात कुछ नहीं, और मेरी पहचान...
कुछ भी नहीं... कुछ भी नहीं...
तुम थे तो बात कुछ हो जाती,
अब सन्नाटे में आवाज...
कुछ भी नहीं.. कुछ भी नहीं...
साथ कोई होता तो हमकदम हो जाता,
इस भीड़ में जज्बातों का मोल,
कुछ नहीं... कुछ भी तो नहीं...
भीड़ के बीच इक शक्ल कभी उभर आती है,
लोग पहचान लें तो हंसी बड़ी आती है,
गर्दो-गुबार के हांथ भी कुछ लग जाता है जहाँ,
मेरे हांथों में वहीँ कुछ भी नहीं... कुछ भी नहीं...
मेरी औकात कुछ नहीं, और मेरी पहचान...
कुछ भी नहीं... कुछ भी नहीं...
तुम थे तो बात कुछ हो जाती,
अब सन्नाटे में आवाज...
कुछ भी नहीं.. कुछ भी नहीं...
साथ कोई होता तो हमकदम हो जाता,
इस भीड़ में जज्बातों का मोल,
कुछ नहीं... कुछ भी तो नहीं...
भीड़ के बीच इक शक्ल कभी उभर आती है,
लोग पहचान लें तो हंसी बड़ी आती है,
गर्दो-गुबार के हांथ भी कुछ लग जाता है जहाँ,
मेरे हांथों में वहीँ कुछ भी नहीं... कुछ भी नहीं...
01 February 2011
Subscribe to:
Comments (Atom)