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01 January 2011

काश कि...

काश कि सपने सच होते, काश कि अपने सब होते,
काश कि मंजिल पा लेती, फिर खो जाती नए सपनों में...

काश कि हर नज़र को, सपन नया कोई दिख जाता,
काश कि हर सपन को, उसकी डगर कहीं मिल जाती...

काश कि तुम पास होते, काश कि मैं कुछ कह पाती,
काश कि बिन बोले ही, तुम तक बात पहुँच जाती...

काश कि ऐसा हो जाता, तो मैं भी कुछ ठहर पाती,
कुछ देर किसी ठौर पर, कुछ पल सुख के जी पाती... काश कि...

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