एक विचार आया आज, अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि जो घटनाएँ कहीं नहीं घटतीं, उनके बारे में सोच-सोच कर हमारा मन परेशान रहता है और हम सबको कहीं सहज नहीं रहने देता.
पता है ये क्या है... ये है हमारे अपने मन का, अपना मनोरंजन आप करने का एक अनूठा ही तरीका. हींग लगे ना फिटकरी, और रंग चोखा का चोखा...
इतनी सी बात समझने में हमलोगों को कितनी माथापच्ची करनी पड़ती है ना...
तो मनवा किसी की ना सुन, बस अपनी मनमानी कर और उसका मज़ा चख.
01 January 2011
काश कि...
काश कि सपने सच होते, काश कि अपने सब होते,
काश कि मंजिल पा लेती, फिर खो जाती नए सपनों में...
काश कि हर नज़र को, सपन नया कोई दिख जाता,
काश कि हर सपन को, उसकी डगर कहीं मिल जाती...
काश कि तुम पास होते, काश कि मैं कुछ कह पाती,
काश कि बिन बोले ही, तुम तक बात पहुँच जाती...
काश कि ऐसा हो जाता, तो मैं भी कुछ ठहर पाती,
कुछ देर किसी ठौर पर, कुछ पल सुख के जी पाती... काश कि...
काश कि मंजिल पा लेती, फिर खो जाती नए सपनों में...
काश कि हर नज़र को, सपन नया कोई दिख जाता,
काश कि हर सपन को, उसकी डगर कहीं मिल जाती...
काश कि तुम पास होते, काश कि मैं कुछ कह पाती,
काश कि बिन बोले ही, तुम तक बात पहुँच जाती...
काश कि ऐसा हो जाता, तो मैं भी कुछ ठहर पाती,
कुछ देर किसी ठौर पर, कुछ पल सुख के जी पाती... काश कि...
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