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13 November 2010

क्या होता है?

क्या होता है जब,
मिटटी की देह का साथ छूट जाता है,
पल पल कि सांसों का हिसाब चूक जाता है,
तन की तपिश का बुखार उतर जाता है,
जीवन के बोध का तार कहीं उलझ जाता है,
इहलोक से जुड़े नाते पीछे छूट जाते हैं,
आत्मा का गमन परलोक को हो जाता है,
क्या होता है जब मुक्ति की राह दिख जाती है,
और
कोई बंधन बाँध नहीं पाता है,
तब क्या होता है, कोई तो बताये तब क्या होता है...

5 comments:

  1. कोई बंधन बाँध नहीं पाता है,
    तब क्या होता है, कोई तो बताये तब क्या होता है..
    गजब कि पंक्तियाँ हैं ...
    बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

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  2. प्रश्न आपका मुश्किल नहीं है पर उत्तर बहुत मुश्किल से निकलता है

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  3. संजय जी, बहुत बहुत शुक्रिया. आपकी हौसला अफजाई सर आँखों पर!!

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  4. सुनील जी, मेरा कहना है कि जब प्रश्न इतना मासूम है तो उत्तर भी सरलमना ही दे दिया जाना चाहिए.
    लेकिन दिया ज़रूर जाये...

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