मौन मौन मौन!
क्रिया या अनुभूति,
या है एक संवेदना
या है सिर्फ मौन!
जीवन रुपी बाज़ार
की हलचल में,
खोता अपना अस्तित्व
वो तब है मौन!
इस संघर्ष
इस यथार्थ से जूझता,
अटूट, अपार कष्टों का
अनुभव करता वो मौन!
कदम पर कदम बढाता
ठहरता, विचारता,
अपने में ही मग्न चलता जाता
वो फिर भी है मौन!!!
आज यह मौन कुछ मुखर होना चाहता है, अपने अस्तित्व को जताना चाहता है. हाथ में कलम, हाथ में माइक, हाथ में कैमरा...
ReplyDeleteलेकिन साहस कहाँ से जुटाए? कहाँ से सच कहने की हिम्मत लाए?
आखिर सच का भी कभी कोई खरीदार हुआ है, हर सच सुहाना भी तो नहीं होता.
लेकिन कहेंगे नहीं तो घुट जायेंगे... और अब भी चुप रहे तो अवसर चुक जायेंगे.
Awaz uthakar dekho khud ko akela nahi paoge...
ReplyDeletekya ye vakayi mai aap ne likhi hai??????????
ReplyDeletetumko shak huaa to koi baat nahin. aage padhti raho, door ho jayenge.
ReplyDeleteकुछ नया लिखा भी पोस्ट कीजिए। और यह क्या, अपना नाम-गाम छुपाने का क्या फायदा। आप जिस प्रोफेशन में हैं और जैसे साहसिक काम करती हैं, उस हिसाब से बताने लायक तो कम-से-कम काफी कुछ है, जो आपके प्रोफाइल में ठीक से जोड़ना चाहिए आपको। एक तस्वीर भी।
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