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06 October 2010

माँ

माँ वो होती है जो आप की शक्ल बनने से पहले और उसे देखने से भी पहले से आप को प्यार करने लगती है! उसको नहीं देखा हमने कभी पर उसकी ज़रूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी!!

02 September 2010

आज

उम्मीदों को तान कर हौसलों की परवान पर, कल का न करें भरोसा आज के आगाज़ पर. आज को संवार लिया तो कल सज ही जायेगा, कोई नया सपना न देख अब जो देखा उसे सच कर!

11 August 2010

मौन! २५.०८.१९९४ को लिखी कुछ पंक्तियाँ

मौन मौन मौन! क्रिया या अनुभूति, या है एक संवेदना या है सिर्फ मौन! जीवन रुपी बाज़ार की हलचल में, खोता अपना अस्तित्व वो तब है मौन! इस संघर्ष इस यथार्थ से जूझता, अटूट, अपार कष्टों का अनुभव करता वो मौन! कदम पर कदम बढाता ठहरता, विचारता, अपने में ही मग्न चलता जाता वो फिर भी है मौन!!!

22 July 2010

05.10.1992 को लिखी एक कविता

माना कि हमने खाई हैं अभी कम ही ठोकरें, लेकिन हर एक ठोकर कोई राज़ जता गई, जितना ही चाहा हर बात हवा में उड़ा देना, उतना हर बात हमें जिंदगी का अंदाज़ बता गई.
क्या अनुवाद और संपादन को साथ साधने में चूक की गुंजाइश बन रही है... लेकिन किसी एक से नैया पार भी तो नहीं लगने वाली... कोई उपाय नहीं नज़र आता है.

13 July 2010

Naya Gyanodaya

naya gyanoday ke july ank main Mamta Kalia ke hantho likhi Kapoornama ki samikha chapi.