हे ईश्वर!
कभी पीडितों को भी राहत मिले औ
दोषियों को सलीब मिल जाए,
हमारे अंदर की दरिंदगी कुछ घटे
थोड़ी मानवता भी उमड़ आए.
हे ईश्वर!
भ्रष्टाचार के इस नंग-नाच से
इस बरस कुछ तो निजात मिल जाए,
महंगाई की मूसलाधार से हम कुचलों को
किसी कृष्ण की उंगली का तनिक संबल ही मिल जाए.
हे ईश्वर!
परिवारों में परिजनों का प्रेम मिले
पत्नी को बराबरी, मां को थोड़ा आदर औ बहन को सुरक्षा मिल जाए,
वहां बेटी सकुचाए कम, खुल के हंसे-खिलखिलाए.
हे ईश्वर!
इस कलयुगी दुनिया में कुछ
खुदाई भी झलक जाए...
हे ईश्वर, यदि सृष्टि का अंत सन्निकट नहीं तो
जीवन कुछ तो सहज बन जाए...
हे ईश्वर!
कभी पीडितों को भी राहत मिले औ
दोषियों को सलीब मिल जाए,
हमारे अंदर की दरिंदगी कुछ घटे
थोड़ी मानवता भी उमड़ आए.
हे ईश्वर!
भ्रष्टाचार के इस नंग-नाच से
इस बरस कुछ तो निजात मिल जाए,
महंगाई की मूसलाधार से हम कुचलों को
किसी कृष्ण की उंगली का तनिक संबल ही मिल जाए.
हे ईश्वर!
परिवारों में परिजनों का प्रेम मिले
पत्नी को बराबरी, मां को थोड़ा आदर औ बहन को सुरक्षा मिल जाए,
वहां बेटी सकुचाए कम, खुल के हंसे-खिलखिलाए.
हे ईश्वर!
इस कलयुगी दुनिया में कुछ
खुदाई भी झलक जाए...
हे ईश्वर, यदि सृष्टि का अंत सन्निकट नहीं तो
जीवन कुछ तो सहज बन जाए...
हे ईश्वर!