स्व: बानी
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30 December 2010
नया बरस
जाते बरस का जाना देख, आते बरस का आना देख,
कुछ किस्सा कुछ अफसाना देख...
... देख दिनन के फेर!!!
यही है आशा कि, लोक: समस्त: सुखिनः भवन्तु!!
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