30 August 2010
11 August 2010
मौन! २५.०८.१९९४ को लिखी कुछ पंक्तियाँ
मौन मौन मौन!
क्रिया या अनुभूति,
या है एक संवेदना
या है सिर्फ मौन!
जीवन रुपी बाज़ार
की हलचल में,
खोता अपना अस्तित्व
वो तब है मौन!
इस संघर्ष
इस यथार्थ से जूझता,
अटूट, अपार कष्टों का
अनुभव करता वो मौन!
कदम पर कदम बढाता
ठहरता, विचारता,
अपने में ही मग्न चलता जाता
वो फिर भी है मौन!!!
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